वो रात वाली सुबह : Romantic love story in hindi


  •  Chapter 1 - मैं कौन ?

  • एक बड़ा सा हॉल, नीला पेंट, रौशनी के नाम पर बस एक नाईट लैंप, फर्श पर एक चटाई और उस चटाई पर लेटा हुआ 23 साल का एक लड़का जो देखने में बहुत ही खूबसूरत है, उसकी आँखें एकदम कत्थई और बाल उफ्फ़ बाल तो ऐसे जैसे सिल्क हो, इतने 
  • चमकीले और रेशमी। उस लडके ने स्काई ब्लू टीशर्ट
  •  और ब्लैक जीन्स पहनी है अचानक से जागता है और चिल्लाने लगता है," मैं कौन हूँ ? मैं कौन हूँ ?"
  • कुछ ही देर में लगभग 12 साल का एक लड़का, जिसका नाम
  •  ज़ुबैद है, उसने हरे रंग का कुर्ता और सफ़ेद चूड़ीदार 
  • पहना है, खाना और दवाइयाँ लेकर आता है और कहता है ,"तुम यहाँ के मालिक हो 
  • और आज हम नौकरों से भी बदतर ज़िन्दगी जी रहे हो। यही हाल होना चाहिए था तुम्हारा जो अब है या शायद इससे भी बुरा।"
  • इतना कह कर ज़ुबैद खाना और दवाइयाँ रखता है और बाहर से
  •  ताला लगा कर चला जाता है। अचंभित सा हुआ जा रहा वो कत्थई आँखों वाला खूबसूरत लड़का कभी खाने की ओर देखता तो कभी
  •  ख़ुद को बार बार छू कर ख़ुद को ही पहचानने की कोशिश करता रहता है। परन्तु हर रोज़ की तरह उसे कुछ याद नहीं आता 
  • और हर बार की तरह वो ख़ुद से ही खीझ कर ख़ुद को ही नोंचने - खसोटने लगता है। कभी कभी तो इतना झल्ला जाता है ये कत्थई
  •  आँखों वाला खूबसूरत लड़का कि ख़ुद के ही शरीर से खून निकालने लगता है।
  • जब कुछ समझ नहीं आता तो चुपचाप खाना शुरु करता है। खाने
  •  की थाली भी देखने लायक है गिनती की एक रोटी, एक प्याज़, एक गिलास, जो कि बस आधा भरा हुआ है पानी से, उसी से दवाई
  •  खानी है और उसी से प्यास बुझानी है। इसके अलावा और पानी चाहिए तो शाम तक इंतज़ार करना पड़ेगा। मीठे के
  •  नाम पर एक पर्ची है थाली में जिसमे कुछ गालियाँ लिखी हैं। रोज़ का यही क्रम है।
  • हाँ तो पाठकों मैं शैफाली आपके लिए ले कर आयी हूँ एक खूबसूरत नौजवान की सस्पेंस और थ्रिल से भरी ऐसी कहानी जो अगर 
  • जीवंत हो सकती है तो आप सबके प्रेम से आशा करती हूँ ये कहानी आप सबके दिल में अपनी जगह बना पाए।
  • अब जानते हैं उस खूबसूरत कत्थई आँखों वाले का नाम उसका नाम है कुणाल। कुणाल खरबन्दा। जो कि कैद है अपने ही घर के खाली
  •  कमरे में, जिसमें न कोई मेज है, न कोई कुर्सी, न ही कोई खिड़की जिससे बाहर झाँक ले या पता लगा ले कि सुबह है या दोपहर है या
  •  शाम। न कोई कूलर, न एयरकंडीशन, बस एक पंखा है जो जब चलता तो आवाज़ के साथ ही चलता है। उस पंखे का भी समय है
  •  चलने का जैसे अपनी मर्ज़ी का मालिक हो पंखा दोपहर में 
  • पंखा बंद कर दिया जाता है क्योंकि गर्मियाँ हैं न ये भी सज़ा का ही हिस्सा है।
  • हाँ एक बटन है जिसके दबाते ही बाहर एक घंटी बजती है। ये बटन इसलिए है ताकि अगर टॉयलेट या पॉटी जाना हो तो घंटी बजा के
  •  किसो को दरवाज़ा खुलवाने के लिए बुलाया जा सके। परन्तु यदि गलती से भी या किसी अन्य चीज की मांग के लिए घंटी बजी तो 
  • 20 कोड़े पीठ पर खाने के बाद ही शांति मिलेगी।
  •  नहाने के लिए कुणाल को दो दिन में एक बार बाहर निकला जाता है। दोपहर में पंखे का
  •  न चलना, दोनों समय आधा - आधा गिलास पानी, 20 कोड़े, किसी खिड़की न होना मतलब घुटन में जीना, रौशनी के नाम पर नाईट
  •  लैंप ये सब सज़ा के पहले चरण का ही हिस्सा हैं। कुणाल को पाँच चरणों में सज़ा मिलनी है। हाँ हाँ पाँच चरण आखिर उसका 
  • अपराध भी तो किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाला है तो सज़ा भी तो उतनी ही दुशवार होगी न।
  • शाम होते ही कुणाल के कमरे का दरवाज़ा खुलता है और एक
  •  आदमी आ कर कमरे में कैमरा सेट कर जाता है। कुणाल ने उससे बात करने की बहुत कोशिश की पर उसने कुणाल से कोई बात
  •  नहीं की। बस चुपचाप अपना काम करता रहा और कैमरा सेट हो जाने के बाद कमरा बंद कर के चला गया। उसे इजाज़त नहीं 
  • थी कुणाल से बात करने की। अगर करता भी तो उसे भी तो सज़ा भुगतनी पड़ती न।
  • कुणाल को कुछ याद ही नहीं है अपने बारे में या जो लोग भी उसके कमरे में आते हैं उनके बारे में। बहुत कोशिश करता है कुणाल पर
  •  उसे कुछ याद ही नहीं आता। जो दवाइयाँ 
  • कुणाल को दी जाती हैं वो उसकी याददाश्त वापस लाने के लिए ही दी जाती हैं ताकि जब उसे
  •  सब याद आएगा तब उसकी सज़ा का दर्द किस हद तक 
  • बढ़ने वाला था इसका तो कुणाल को या उसके नौकरों को अंदाजा भी नहीं है।
  • ख़ैर, रात के 8 बजे हैं और बाहर से गाना गाते हुए किसी लड़की की आवाज़ आ रही है कुणाल को, पर उसे नहीं समझ आ रहा कि ये
  •  कौन हो सकती है। कुछ ही देर में ज़ुबैद खाना और दवाइयाँ ले कर आता है और कुणाल के सामने रख देता है। इस बार कुणाल 
  • ज़ुबैद का हाथ पकड़ लेता है और उससे पूछता है ,"मुझे सच बताओ मैं कौन हूँ ?"
  • ज़ुबैद अपना हाथ एक झटके से छुड़ाता है और कहता है ,"इसकी भी सज़ा है तुम्हारे लिए, तुमने मुझे पकड़ने की कोशिश भी कैसे की 
  • ज़ुबैद बाहर जाता है और कोड़ा ले कर आता है। कोड़ा देखते ही कुणाल की आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था पर सज़ा तो
  •  मिलेगी ही तड़ाक तड़ाक तड़ाक एक के बाद एक बीस कोड़े उसकी पीठ पर ज़ुबैद ने जड़ दिए और जाते जाते हिदायत दे कर गया
  •  ,"आज की रात किसी भी करवट से नहीं सोना
  •  है पीठ के बल सीधा ही सोना है। बाकी तुम समझदार हो कैमरा लगा है न आज ही सब
  •  दिखाई देगा इसमें कि तुम क्या कर रहे हो। दर्द क्या होता है ये तुमको समझ आना चाहिए, इसलिए ये कैमरा लगाया गया है।"
  • इतना कह कर एक डेविल हँसी हँसते हुए ज़ुबैद चला जाता है। ज़ुबैद इस घर के माली हनीफ़ का बेटा है। हनीफ़ चाचा इस हवेली
  •  में अपने बचपन से काम करते आ रहे हैं और अब अपने बेटे और बेटी दोनों को उन्होंने ही माली का काम सिखाया था। अब हनीफ़
  •  चाचा बीमार रहने लगे थे तो पिछले 3 साल से ज़ुबैद और उसकी बहन हमीदा यहाँ हवेली में काम करने लगे थे। 3 साल पहले से
  •  यानि कि 9 साल की उम्र से ही दोनों के ऊपर ज़िम्मेदारी का बोझ आ गया था। हमीदा और ज़ुबैद दोनों जुड़वाँ भई बहन थे।
  • पर अब बस ज़ुबैद ही है यहाँ हवेली में माली का काम करने के लिए और कुणाल के लिए भी। हमीदा अब ज़िंदा नहीं है। एक दर्दनाक
  •  घटना ने उसे ज़ुबैद और उसके अब्बू (हनीफ़ चाचा) से जुदा कर दिया। वैसे तो हवेली में और भी लोग हैं, जैसे कुणाल की माँ,
  •  जिनकी उम्र लगभग 52 साल होगी और एक लड़की है जो लगभग कुणाल की ही हमउम्र है। दो नौकर हैं जो घर का काम करते हैं, एक कुत्ता है जो लेब्रा ब्रीड का है।
  • आज बस कहानी में यहाँ तक ही दोस्तों कल फिर एक नए खुलासे के साथ नया चैप्टर ले कर आऊँगी।
  • तब तक के लिए अपना ख्याल रखियेगा।

  • Chapter 2 - मेहरबानी

  • Recap.... कुणाल को खाने पड़े थे 20 कोड़े ज़ुबैद का हाथ
  •  पकड़ने के जुर्म में और हिदायत थी कि करवट के बल नहीं सोना है। आख़िर कोड़े की मार का दर्द भी तो बढ़ाना था......
  • अब आगे.....
  • कोड़े मारने के बाद करवट न बदलने की हिदायत दे कर ज़ुबैद बाहर से ताला लगा कर चला जाता है। कुणाल इतनी मार खाने के बाद
  •  खाने की तरफ़ देखता तक नहीं। आज उसकी आँखों में आँसु है। अब ये आँसु दर्द की वजह से हैं या दवाइयों का असर हो
  •  रहा है, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। पिछले तीन महीने से कुणाल यहाँ कैद है।
  • तीन महीनों में एक बार भी कुणाल से किसी ने बात नहीं की थी।
  •  ज़ुबैद के अलावा कुणाल ने किसी को देखा तक नहीं था। सारी भावनायें कुणाल की दबी पड़ी थीं दिमाग़ के या कहो दिल के
  •  किसी कोने के नीचे। ये सब ऐसे ही चलने वाला है जब तक उसकी याददाश्त वापस नहीं आ जाती। कुणाल कुछ देर तक रोता रहा
  •  फिर कुछ देर बाद बाहर से उसी लड़की की आवाज़ आयी जो ज़ुबैद के खाना लाने से पहले गा रही थी।
  • वो बोलती है बाहर से.... कुणाल !! तुम खाना खा लो नहीं तो फिर मार पड़ेगी।
  • इतना सुनते ही कुणाल उठ के दरवाज़े की ओर भाग कर आता है ओर पूछता है कि....
  • तुम कौन हो और इन क्रूर लोगों के बीच क्या कर रही हो ?
  • क्या नाम है तुम्हारा ?
  • मेरा नाम कैसे पता तुम्हें ?
  • हाँलाकि मुझे भी मेरा नाम याद नहीं ये तो ज़ुबैद बताता है कि मेरा नाम कुणाल है।
  • तुम ज़ुबैद को जानती हो क्या ?
  • मुझे मार पड़ेगी इसकी चिंता तुम्हें क्यों हो रही है ?
  • आख़िर हो कौन तुम ?
  • इतने सारे सवाल एक साथ एक ही साँस में कुणाल ने उस अनजान
  •  लड़की से पूछ लिए। पर वो लड़की वहाँ से बिना कुछ सुने जा चुकी थी। वो तो बस यही कहने आयी थी कि खाना खा लो वरना मार
  •  पड़ेगी। वो भी इसलिए आ पायी क्योंकि ज़ुबैद रात में नहीं रुकता है यहाँ। वो अपने अब्बू की देखभाल के लिए रात को घर चला जाता 
  • है और फिर आज ही तो कैमरा लगा है न कुणाल के कमरे में तो उसी में दिखा उसे कि कुणाल ने अब तक खाना नहीं खाया है।
  • कुणाल उस लड़की को आवाज़ ही लगाता रह गया पर कोई जवाब न मिला कुणाल को। अंत में हार कर वह चुप हो गया और खाना
  •  खाने के लिए जैसे ही थाली पर से कपड़ा हटाया तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गयीं। वो थाली देख के सोंचता रहा ज़रा देर तक
  •  तो कि आख़िर ऐसा कैसे हो गया आज ? फिर कुछ सोंच के खाना खाने लगा। आज खाना खाने में उसे बहुत आनंद आया। आख़िर
  •  खाने में आज देसी घी के पराठे, मटर आलू की रशे वाली सब्ज़ी, बैंगन का भरता, खीरे का रायता और मखाने की खीर जो है।
  • उसने खाना खाया और पानी का गिलास उठाया तो देखा आज पानी भी पूरा गिलास भरा हुआ है। फिर दवाइयाँ खा कर वो चटाई
  •  पर सीधा लेटा और उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान बिखर गयी। कुछ ही देर में कुणाल सो गया था।
  • सुबह के 7:25 बज रहे है और कुणाल की आँख खुलती है बाहर हो रहे शोर से। बाहर से ज़ुबैद की आवाज़ आ आरही है। ज़ुबैद उस
  •  लड़की के ऊपर चिल्ला रहा है कि क्यों किया तुमने ऐसा ? आख़िर चाहती क्या हो तुम ? पर कुणाल को नहीं पता कि ज़ुबैद उसी
  •  लड़की पर चिल्ला रहा है जो रात उसकी फ़िक्र में आयी थी क्योंकि कुणाल को बाहर का तो कुछ दिख नहीं रहा बस ज़ुबैद की आवाज़
  •  आ रही है चिल्लाने की। बाकी दूसरी कोई आवाज़ नहीं आयी। वो लड़की बिना कुछ बोले चुपचाप वहाँ से अंदर चली गयी।
  • ज़ुबैद इतना सीधा भी न था। उसने कुणाल के कमरे में कैमरा लगाने के साथ - साथ कमरे के बाहर भी एक कैमरा छुपा कर लगाया था
  •  ताकि पता रहे कि उसके पीछे से कुछ गड़बड़ तो नहीं हो रही है। क्योंकि उसे अंदाजा था इस बात का कि कुणाल की याददाश्त
  •  शायद वापस आने लगी है। ज़ुबैद ने नोटिस किया था कि उसके उठने बैठने का ढंग दो तीन दिन से कुछ बदल सा गया है। जबकि
  •  तीन महीने से वो कैद है यहाँ, तब ऐसा नहीं था। इसलिए ज़ुबैद कुणाल पर कड़ी नज़र रखना चाहता था।
  • दरवाज़ा खुलता है और ज़ुबैद सामने से हाथ में चाय का कप लेकर आते हुए आज बोलता है कि..
  • और भेड़िये... रात का खाना हज़म हुआ कि नहीं ?
  • वो क्या है न कि पिछले तीन महीने से आदत छूट गयी है न तुम्हारी इतना अच्छा खाना खाने की।
  • कुणाल कुछ नहीं बोलता बस एक हल्की सी मुस्कान लिए चुपचाप चाय का कप ज़ुबैद से ले लेता है और चाय पीने लगता है। ज़ुबैद
  •  बाहर से ताला लगा के चला जाता है। 10 बजे करीब ज़ुबैद वापस ताला खोलता है और कुणाल को नहाने के लिए लेकर जाता है। दो
  •  दिन हो गए थे न कुणाल को नहाये हुए। पर आज कुछ अलग बात थी, आज बाथरूम भी कुणाल को साफ़ मिला वरना हर बार गंदे
  •  बाथरूम में उसे नहाने मिलता था। रात खाना भी ढंग से मिला... ढंग से नहीं कुछ ज़ादा ही अच्छा मिला। उस हिसाब से तो शाही 
  • भोजन था वो जिस हिसाब से रोज़ एक रोटी और एक प्याज़, आधा गिलास पानी मिलता था। फिर वो लड़की.... उसे भी मानो तरस 
  • आ रह था कुणाल पर तभी तो कह कर गयी कि खाना खा लो वरना मार पड़ेगी।
  • नहाने के बाद ज़ुबैद वापस लेकर आया कमरे में कुणाल को और आज तो एक और मेहरबानी की जा रही है उसके साथ। आज
  •  कुणाल को नए कपड़े दिए गए हैं पहनने के लिए। वरना एक महीने में एक बार कपड़े बदले जाते थे वो भी पुराने होते थे। पर आज तो
  •  बिल्कुल नए कपड़े... ये सोंच के कुणाल मन ही मन हँसा और उसकी आँखों में एक अजीब सी हलचल आने लगी। ये देख के
  •  ज़ुबैद भी एक डेविल हँसी हँसा और बाहर से ताला लगा के चला गया। आज दोपहर को भी शाही भोजन दिया गया कुणाल को।
  •  ज़ुबैद अब jaan चुका था कि कुणाल को अब यहाँ रखना खतरे से खाली नहीं है और इसीलिए उसने अब कुणाल की माँ अनुराधा जी
  •  से बात करना सही समझा। शाम होते ही ज़ुबैद उनके पास गया और उनसे कुणाल को यहाँ से कहीं और ले जाने के लिए ज़ोर देने
  •  लगा पर अनुराधा जी ने साफ मना कर दिया। उन्होंने ज़ुबैद को आज्ञा दे दी कि चाहें कुछ भी हो जाये कुणाल यहीं रहेगा और
  •  अब उसकी सुरक्षा के लिए जो भी इंतज़ाम करने हैं वो यहीं करो।
  • क्या है इस रहस्यमयी मुस्कान का मतलब जो कुणाल के चेहरे पर दिखाई दे रही है ?
  • क्या है ज़ुबैद की डेविल हँसी का राज़ ?
  • क्यों कुणाल पर रात से इतनी मेहरबानी की जा रही है ?
  • इन सबका तो पता अगले ही चैप्टर में लगेगा। तो जानने के लिए पढ़ें चैप्टर 3.... "मेहरबानियाँ और राज़"
  • Precap _ कुणाल की माँ अनुराधा जी ज़ुबैद का हाथ कस के
  •  पकड़ लेती हैं और उसको सख्त हिदायत देती हैं कि कल भी कुणाल को यही खाना मिलना चाहिये।
  • दूसरी तरफ़ कोई है जो कुणाल के मरने का इंतज़ार कर रहा है और कोई और भी है जो कुणाल को ज़िंदा रखना चाहता है।
  • मिलते हैं अगले चैप्टर में... 🙏

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